राष्ट्रीय किसान दिवस (Kisan Diwas) भारत में 23 दिसंबर को पूरे देशभर में मनाया गया। यह दिन किसानों के योगदान को सम्मान देने के लिए समर्पित है और इसे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है।
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भारत में देश का किसान अन्नदाता और “धरती पुत्र” माना जाता है, और आज के दिन उनकी मेहनत और समर्पण को सराहा गया।
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किसान दिवस का उद्देश्य कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में किसानों के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डालना है।
🌾 इतिहास & महत्व
चौधरी चरण सिंह, जो स्वयं किसान वर्ग से आते थे और किसानों के लिए नीतियाँ बनाते रहे, के जन्मदिन के कारण 23 दिसंबर को यह दिवस मनाया जाता है। इस दिन का महत्त्व इसलिए भी है कि यह किसानों के कल्याण और कृषि विकास के लिए एक प्रेरणादायक अवसर प्रदान करता है।
📌 2025 में खास
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सरकार और कई कृषि संगठनों ने किसानों के लिए योजनाओं और सहायता कार्यक्रमों को उजागर किया ताकि उनकी आजीविका और कृषि उत्पादन को बेहतर बनाया जा सके।
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किसान दिवस पर सोशल मीडिया और मीडिया साइटों पर किसानों के लिए शुभकामनाएँ, प्रेरक संदेश और कोट्स बड़े पैमाने पर शेयर किए गए।
🚜 कार्यक्रम और आयोजन
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कई जिलों और कृषि विभागों द्वारा जनपद स्तरीय किसान मेले, सम्मान दिवस और कार्यशालाएँ आयोजित की गईं, जहां किसानों को नई कृषि तकनीक, योजनाओं और सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई।
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कुछ जगहों पर जिलाधिकारी और अधिकारी किसानों से उनकी समस्याओं पर बातचीत कर समाधान की दिशा में कदम भी उठाते नजर आए।
🧑🌾 मुद्दे और विचार
हालाँकि किसान दिवस को सम्मान से मनाया गया, किसानों की समस्याएँ जैसे समय पर खाद न मिलना, सिंचाई की चुनौतियाँ, और उचित मूल्य न मिलना अभी भी देश के कई हिस्सों में जारी हैं, जिस पर कृषि विशेषज्ञ और किसान संगठन अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।