Ganesh Sthapana 2026: गणेश चतुर्थी पर घर-घर गूंजे ‘गणपति बप्पा मोरया’, विधि-विधान से हुई गणेश स्थापना
देशभर में आज गणेश चतुर्थी का पर्व श्रद्धा, उमंग और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही मंदिरों और घरों में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया। भक्तों ने शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। गणपति बप्पा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय नजर आया।
गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा है। यही वजह है कि गणेश चतुर्थी का दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।
घरों में हुई गणपति बप्पा की स्थापना
गणेश चतुर्थी के अवसर पर सुबह से ही लोग बाजारों में भगवान गणेश की प्रतिमा खरीदने के लिए पहुंचते दिखाई दिए। छोटी से लेकर बड़ी और आकर्षक प्रतिमाओं की खूब मांग रही। कई परिवारों ने पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को प्राथमिकता दी।
प्रतिमा को घर लाने के बाद भक्तों ने पूजा स्थल को फूलों, रंगोली और सजावटी सामान से सजाया। इसके बाद विधि-विधान से भगवान गणेश की स्थापना की गई। स्थापना के दौरान ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से माहौल में खास उत्साह देखने को मिला।
पूजा में दिखी आस्था और अपनापन
Ganesh Sthapana केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि परिवार और समाज को एक साथ जोड़ने वाला अवसर भी है। कई घरों में बच्चों ने सजावट में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, वहीं बुजुर्गों ने उन्हें पूजा की परंपराओं और महत्व के बारे में बताया।
पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा, फूल, फल और मोदक अर्पित किए गए। मान्यता है कि भगवान गणेश को मोदक विशेष रूप से प्रिय हैं। आरती के समय परिवार के सभी सदस्य एक साथ नजर आए। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने श्रद्धा के साथ गणपति बप्पा का आशीर्वाद लिया।
बाजारों में भी रही रौनक
गणेश चतुर्थी को लेकर बाजारों में भी काफी चहल-पहल रही। फूल, पूजा सामग्री, सजावटी सामान और मिठाइयों की दुकानों पर लोगों की भीड़ दिखाई दी। गणेश प्रतिमाओं को आकर्षक ढंग से सजाकर रखा गया था, जिन्हें खरीदने के लिए लोग परिवार के साथ बाजार पहुंचे।
कई स्थानों पर सार्वजनिक गणेश उत्सव के लिए भी विशेष पंडाल तैयार किए गए हैं। यहां आने वाले दिनों में पूजा, आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश
इस बार गणेश उत्सव के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी लोगों में जागरूकता देखने को मिल रही है। श्रद्धालु मिट्टी से बनी प्रतिमाओं को अपनाने के साथ-साथ प्राकृतिक सजावटी सामग्री का इस्तेमाल करने पर जोर दे रहे हैं। इससे पर्व की धार्मिक भावना के साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी मिलता है।
गणेश चतुर्थी का असली आनंद केवल उत्सव और सजावट में नहीं, बल्कि उस भावना में है जिसके साथ भक्त अपने घर भगवान गणेश का स्वागत करते हैं। गणपति बप्पा के आने के साथ घरों में सकारात्मकता और खुशियों का माहौल बन जाता है।
भक्तों को उम्मीद है कि विघ्नहर्ता भगवान गणेश सभी के जीवन से परेशानियां दूर करेंगे और सुख, शांति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि प्रदान करेंगे। इसी विश्वास के साथ आज हर तरफ एक ही आवाज सुनाई दे रही है—‘गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया!’


