दशहरा 2026 की 5 बड़ी बातें! 🔥
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Dussehra Special 2026: दशहरे पर रावण दहन से लेकर कुल्लू के विश्व प्रसिद्ध उत्सव तक, जानें इस पर्व की खास बातें

बुराई पर अच्छाई की जीत, अधर्म पर धर्म की विजय और अहंकार के अंत का संदेश लेकर आया है Dussehra देशभर में विजयादशमी का त्योहार श्रद्धा, उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। कहीं भगवान श्रीराम की विजय की खुशी में रावण दहन की तैयारियां हैं, तो कहीं मां दुर्गा की आराधना के बाद विजयादशमी का पर्व मनाया जा रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर साल रावण का पुतला जलाने के बावजूद हमारे जीवन में बुराई क्यों बनी रहती है? इस दशहरे पर यही सवाल इस त्योहार को और भी खास बनाता है।

Dussehra 2026 कब मनाया जा रहा है?

इस साल Dussehra  यानी विजयादशमी मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर लगभग 12:50 बजे शुरू होकर 21 अक्टूबर को दोपहर लगभग 2:11 बजे तक रहेगी। हालांकि, क्षेत्रीय परंपराओं और पंचांग के अनुसार कुछ स्थानों पर विजयादशमी 21 अक्टूबर को भी मनाई जा सकती है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय कार्यक्रम और पूजा का समय जरूर जांचें।

रावण दहन: सिर्फ एक परंपरा नहीं, जीवन का सबसे बड़ा संदेश

दशहरे की शाम आते ही मैदानों में लोगों की भीड़ उमड़ने लगती है। रंग-बिरंगी रोशनी, रामलीला के मंच, मेले और ऊंचे रावण के पुतले त्योहार की रौनक बढ़ा देते हैं। भगवान श्रीराम द्वारा रावण पर विजय की याद में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रावण अत्यंत विद्वान और शक्तिशाली था, लेकिन उसका अहंकार और गलत निर्णय उसके पतन का कारण बने। यही वजह है कि दशहरा हमें सिखाता है कि ज्ञान और ताकत से भी अधिक जरूरी है सही रास्ते पर चलना।

इस दशहरे पर अपने अंदर के रावण को पहचानें। क्या वह गुस्सा है? अहंकार है? दूसरों से ईर्ष्या करना है या किसी का अपमान करना? अगर हम इन बुराइयों को छोड़ने का संकल्प लें, तभी दशहरे का असली अर्थ पूरा होगा।

कुल्लू Dussehra 2026 क्यों है खास?

हिमाचल प्रदेश का विश्व प्रसिद्ध कुल्लू दशहरा अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है। देश के कई हिस्सों में दशहरे पर रावण दहन के साथ उत्सव समाप्त होता है, जबकि कुल्लू में विजयादशमी से ही सात दिवसीय उत्सव की शुरुआत होती है। इस साल कुल्लू दशहरा 21 से 27 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है।

इस उत्सव में देवी-देवताओं की पारंपरिक पालकियां, धार्मिक आयोजन, लोक संस्कृति और संगीत लोगों के आकर्षण का केंद्र बनते हैं। कुल्लू का दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Dussehra  2026 पर क्या लें संकल्प?

इस साल दशहरे को केवल मेले और आतिशबाजी तक सीमित न रखें। परिवार के साथ समय बिताएं, जरूरतमंद लोगों की मदद करें, पर्यावरण की रक्षा करें और समाज में प्रेम व सद्भाव बढ़ाने का प्रयास करें। रावण दहन के दौरान भीड़ से सुरक्षित दूरी रखें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

असली विजय अपने भीतर की बुराई पर है

दशहरा हमें याद दिलाता है कि जीवन में कठिनाइयां कितनी भी बड़ी क्यों न हों, सच्चाई और धर्म का रास्ता अंततः जीत की ओर ले जाता है। भगवान श्रीराम की विजय की यह कहानी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी सदियों पहले थी।

इस दशहरे पर एक सवाल खुद से जरूर पूछें: क्या हम सिर्फ रावण का पुतला जला रहे हैं, या अपने भीतर की बुराइयों को भी खत्म कर रहे हैं?

आप सभी को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं। आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और नई उम्मीदों का प्रकाश बना रहे।

जय श्रीराम! शुभ विजयादशमी!

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