कुछ फिल्में सिर्फ पर्दे पर कहानी नहीं दिखातीं, बल्कि खत्म होने के बाद भी दिमाग में चलती रहती हैं। ‘दृश्यम’ ऐसी ही फिल्मों में शामिल है। विजय सालगांवकर की कहानी ने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि परिवार को बचाने की कोशिश में इंसान किस हद तक जा सकता है और सही-गलत की सीमा आखिर कहां खत्म होती है।
2015 में रिलीज हुई हिंदी ‘दृश्यम’ का निर्देशन निशिकांत कामत ने किया था। फिल्म में अजय देवगन, तब्बू, श्रिया सरन, इशिता दत्ता और राजत कपूर जैसे कलाकार नजर आए। कहानी विजय सालगांवकर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कम पढ़ा-लिखा लेकिन बेहद समझदार व्यक्ति है और अपने परिवार से बेहद प्यार करता है। एक अप्रत्याशित घटना उसके शांत जीवन को पूरी तरह बदल देती है। इसके बाद शुरू होता है पुलिस जांच, झूठ, सबूत और दिमागी चालों का ऐसा सिलसिला, जो दर्शकों को लगातार कहानी से जोड़े रखता है। कहानी में क्या खास है?
‘दृश्यम’ की सबसे बड़ी ताकत इसका कॉन्सेप्ट है। फिल्म किसी सुपरहीरो की कहानी नहीं है। विजय कोई बड़ा अपराधी या प्रशिक्षित जासूस भी नहीं है। वह एक सामान्य परिवार वाला आदमी है, जिसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी परिस्थिति को समझने और तेजी से सोचने की क्षमता बन जाती है।
फिल्म का दूसरा हिस्सा खास तौर पर ज्यादा प्रभावशाली महसूस होता है, क्योंकि यहीं से असली सस्पेंस तेज होता है। पुलिस और विजय के बीच चलने वाला मानसिक खेल कहानी को दिलचस्प बनाए रखता है।
अजय देवगन और तब्बू की एक्टिंग
अजय देवगन ने विजय सालगांवकर के किरदार को शांत और गंभीर अंदाज में निभाया है। उनकी आंखों और चेहरे के हावभाव में कई बार वह तनाव दिखाई देता है जिसे किरदार शब्दों में व्यक्त नहीं करता। तब्बू ने पुलिस अधिकारी मीरा देशमुख के रूप में कहानी में दूसरी मजबूत परत जोड़ी है। वह एक अधिकारी होने के साथ-साथ अपने बेटे को खो चुकी मां भी हैं, इसलिए उनके किरदार में कानून और भावनाओं का संघर्ष दिखाई देता है।
आलोचकों ने भी तब्बू के प्रदर्शन और फिल्म के दूसरे हिस्से में बढ़ते तनाव को इसकी प्रमुख खूबियों में गिना था। हालांकि कुछ समीक्षाओं में फिल्म के धीमे शुरुआती हिस्से और कुछ कलाकारों की प्रस्तुति को कमजोर कड़ी माना गया।
Drishyam 2 ने कहानी को आगे बढ़ाया
2022 में आई ‘दृश्यम 2’ ने सात साल बाद विजय और उसके परिवार की कहानी को आगे बढ़ाया। इस बार निर्देशक की कुर्सी पर अभिषेक पाठक थे। फिल्म में अजय देवगन और तब्बू के साथ अक्षय खन्ना भी महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई दिए।
सीक्वल की खासियत यह रही कि उसने सिर्फ पुराने सस्पेंस को दोहराने की कोशिश नहीं की, बल्कि परिवार पर बीते वर्षों के मानसिक दबाव को भी कहानी का हिस्सा बनाया। हालांकि कुछ समीक्षकों ने इसके पहले हिस्से की धीमी गति और कुछ किरदारों के चित्रण पर सवाल उठाए, लेकिन फिल्म के ट्विस्ट और क्लाइमैक्स ने दर्शकों का ध्यान बनाए रखा।
अब कहानी पहुंची है तीसरे अध्याय तक
2026 में ‘Drishyam: The Conclusion’ के साथ यह कहानी अपने तीसरे और अंतिम अध्याय में पहुंच गई है। अजय देवगन, तब्बू और श्रिया सरन अपने प्रमुख किरदारों में लौटे हैं, जबकि जयदीप अहलावत और प्रकाश राज जैसे कलाकारों की नई मौजूदगी कहानी में नए सवाल खड़े करती है। फिल्म का निर्देशन एक बार फिर अभिषेक पाठक ने किया है।
अंतिम राय
‘दृश्यम’ की असली खूबसूरती उसके ट्विस्ट से ज्यादा उसके मानवीय पक्ष में है। विजय के फैसलों को देखते हुए दर्शक बार-बार खुद से सवाल करता है—अगर परिवार खतरे में हो तो हम क्या करेंगे? यही सवाल फिल्म को एक सामान्य क्राइम थ्रिलर से आगे ले जाता है।
अजय देवगन का संयमित अभिनय, तब्बू की मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस और कहानी का लगातार बदलता तनाव इसे हिंदी सिनेमा की चर्चित सस्पेंस फिल्मों में जगह देता है। अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जिनमें एक्शन से ज्यादा दिमाग, भावनाएं और रहस्य काम करते हैं, तो ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइज़ी आपके लिए खास अनुभव हो सकती है।




