CJP Protest गांधी जयंती के दिन 2 अक्टूबर 2026 को मुंबई और दिल्ली में चुनाव आयोग तथा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। मुंबई में Cockroach Janta Party (CJP) ने शिवाजी पार्क में प्रदर्शन का आयोजन किया, जबकि दिल्ली के जंतर-मंतर पर अलग-अलग छात्र और सामाजिक संगठनों की ओर से विरोध का आह्वान किया गया। दोनों जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक तथा सामाजिक बहस भी तेज हुई।
मुंबई में CJP का प्रदर्शन
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मुंबई के शिवाजी पार्क में ‘जेल भरो आंदोलन’ का आह्वान किया था। संगठन का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों, खासकर Special Intensive Revision (SIR) को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। CJP ने अपने आंदोलन को चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े सवालों की आवाज के रूप में पेश किया है।
प्रदर्शन से पहले मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में कार्यक्रम की अनुमति देने से इनकार किया था। इसके बाद CJP की ओर से वैकल्पिक रणनीति और कानूनी रास्ते की बात कही गई। 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क और आसपास के इलाकों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन से पहले दिपके को मरीन ड्राइव इलाके में कुछ समय के लिए हिरासत में भी लिया गया।
स्थानीय लोगों की आपत्ति भी सामने आई
प्रदर्शन के बीच शिवाजी पार्क के कुछ स्थानीय निवासियों और कारोबारियों ने भी अपनी चिंताएं जाहिर कीं। उनका कहना था कि बड़े सार्वजनिक प्रदर्शनों से इलाके में शोर, यातायात और रोजमर्रा के कारोबार पर असर पड़ सकता है। कुछ स्थानीय व्यवसायियों ने विरोध प्रदर्शनों के कारण कामकाज प्रभावित होने की बात कही।
इससे यह सवाल भी चर्चा में आया कि लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार और स्थानीय निवासियों की रोजमर्रा की परेशानियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
दिल्ली में क्या हुआ?
दिल्ली में 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर CJP का वही मुंबई वाला प्रदर्शन नहीं था। वहां AISA, NSUI, Indian Youth Congress और अन्य समूहों की ओर से चुनाव आयोग और CEC को लेकर विरोध का कार्यक्रम रखा गया था। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से प्रदर्शन को लेकर प्रतिबंध लगाए और मध्य दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ नेताओं और प्रदर्शनकारियों को प्रदर्शन स्थल की ओर जाने से रोका गया या हिरासत में लिया गया।
दिल्ली मेट्रो की ओर से भी प्रदर्शन के मद्देनजर कई स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद किए जाने की जानकारी सामने आई। इस पर CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी सवाल उठाए और मुंबई में प्रदर्शन पर लगाई गई पाबंदियों की तुलना दिल्ली की व्यवस्थाओं से की।
आगे क्या हो सकता है?
अभिजीत दिपके ने संकेत दिया है कि CJP का आंदोलन केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा। उनके अनुसार, संगठन आगे देश के अन्य हिस्सों में भी प्रदर्शन कर सकता है और दिल्ली में अक्टूबर के अंत में कार्यक्रम की योजना की बात सामने आई है। CJP ने यह भी कहा है कि उसका आंदोलन विपक्षी दलों के आंदोलनों से अलग रहेगा।
फिलहाल मुंबई और दिल्ली के घटनाक्रम ने चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची में बदलाव और विरोध प्रदर्शन के अधिकार जैसे मुद्दों को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में प्रशासन, राजनीतिक दलों और प्रदर्शन आयोजकों के अगले कदम इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे।





