2026 Navratri: नवरात्रि कब से शुरू? जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पूरी तारीखें
सिर्फ नौ दिनों का धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, आस्था और सामूहिक उत्साह का ऐसा रंग है, जिसमें हर उम्र और हर वर्ग के लोग अपनी-अपनी तरह से शामिल होते हैं। नवरात्रि आते ही मंदिरों में घंटियों की गूंज बढ़ जाती है, घरों में पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं और बाजारों में रौनक दिखाई देने लगती है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और भक्त अपने घर-परिवार की सुख-समृद्धि तथा शांति की कामना करते हैं।
इस बार Navratri में क्या है खास?
नवरात्रि के दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सांस्कृतिक आयोजनों की भी धूम रहती है। कहीं भव्य दुर्गा पंडाल सजाए जाते हैं, तो कहीं गरबा और डांडिया की शामें लोगों को आकर्षित करती हैं। शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, बाजारों में पूजा सामग्री, चुनरी, माता की मूर्तियां और सजावटी सामान की मांग बढ़ जाती है।
नवरात्रि का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि इसकी खुशी केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहती। घरों में सुबह की आरती, व्रत रखने वाले परिवारों की तैयारियां और शाम को होने वाली पूजा पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती है। कई परिवार इन दिनों को अपने रिश्तेदारों और पुराने दोस्तों से मिलने का अवसर भी मानते हैं।
Navratri 2026 कब से शुरू होगी?
2026 में शारदीय नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी और 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी (दशहरा) मनाया जाएगा। 11 अक्टूबर को घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा होगी।
घटस्थापना का समय शहर के अनुसार बदलता है। उदाहरण के लिए दिल्ली में 11 अक्टूबर को घटस्थापना मुहूर्त सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक बताया गया है, जबकि अभिजीत मुहूर्त 11:44 से 12:31 बजे है। यह भी बेहतर है कि पाठक अपने शहर के पंचांग के अनुसार अंतिम समय देखें।
2026 के उपलब्ध पंचांग विवरण में 19 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी/महागौरी पूजा और 20 अक्टूबर को नवमी हवन, नवरात्रि पारण तथा विजयादशमी दर्ज है। स्थानीय परंपरा और पंचांग के अनुसार अष्टमी-नवमी के आयोजन में अंतर हो सकता है।
कलश स्थापना की सामान्य विधि
सबसे पहले पूजा की जगह को साफ करके चौकी स्थापित करें। उसके पास मिट्टी में जौ बोएं। इसके बाद कलश में जल भरें और उसमें अक्षत, सुपारी तथा सिक्का आदि रखें। कलश के मुख पर पत्ते लगाकर उसके ऊपर लाल कपड़े में लिपटा नारियल रखें।
इसके बाद कलश को जौ के ऊपर स्थापित करें और मां दुर्गा का ध्यान करते हुए पूजा करें। दीपक जलाएं, धूप-दीप दिखाएं और मां की आरती करें। कई परिवारों में पूरे नौ दिनों तक अखंड ज्योति भी जलाई जाती है, लेकिन यदि अखंड ज्योति रखें तो उसकी देखभाल की व्यवस्था पहले से करना जरूरी है।
महत्वपूर्ण: घटस्थापना के मुहूर्त को लेकर अलग-अलग शहरों में समय अलग हो सकता है क्योंकि स्थानीय सूर्योदय और पंचांग गणना का प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए दिल्ली और वाराणसी के 11 अक्टूबर 2026 के मुहूर्त में अंतर है।
बाजारों में दिख रही त्योहार की रौनक
नवरात्रि के करीब आते ही बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ जाती है। फल, पूजा सामग्री, नारियल, चुनरी और व्रत में इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री की खरीदारी बढ़ती है। कपड़ों और आभूषणों की दुकानों पर भी लोग त्योहार के लिए खरीदारी करते नजर आते हैं।
दुकानदारों के लिए भी यह समय कारोबार के लिहाज से महत्वपूर्ण होता है। स्थानीय बाजारों में छोटे दुकानदार, फूल विक्रेता, कारीगर और सजावट का सामान बेचने वाले लोग त्योहार से जुड़ी मांग का इंतजार करते हैं।
भक्ति के साथ पर्यावरण का ध्यान भी जरूरी
बदलते समय के साथ नवरात्रि मनाने का तरीका भी बदल रहा है। कई जगह लोग पर्यावरण के अनुकूल सजावट, मिट्टी की प्रतिमाओं और कम प्लास्टिक इस्तेमाल करने पर जोर दे रहे हैं। यह बदलाव बताता है कि परंपराओं को निभाते हुए प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी भी निभाई जा सकती है।
नवरात्रि का असली संदेश केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। यह हमें शक्ति, संयम, सकारात्मकता और बुराई पर अच्छाई की जीत की याद दिलाता है। शायद यही वजह है कि हर साल नवरात्रि लौटकर आती है और अपने साथ वही पुरानी श्रद्धा, लेकिन नए उत्साह के साथ लोगों के दिलों को जोड़ देती है।
इस नवरात्रि जब मंदिर की घंटियां सुनाई दें या घर में मां की आरती हो, तो कुछ पल ठहरकर उस भावना को महसूस करना भी इस पर्व को खास बना सकता है। आखिर नवरात्रि केवल कैलेंडर की नौ तारीखें नहीं, बल्कि विश्वास और उम्मीद से भरे वे दिन हैं, जब पूरा माहौल मां की भक्ति के रंग में रंग जाता है।


