बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक सरकारी कार्यक्रम में एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का हिजाब (Hijab) हटाते हुए दिखाई दिए, जिससे विवाद गरमा गया है। यह घटना तब सामने आई जब मुख्यमंत्री आयुष (AYUSH) डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र देने के लिए पटना में एक समारोह आयोजित कर रहे थे।
वीडियो में दिख रहा है कि डॉ. नुसरत परवीन नाम की महिला जब अपना नियुक्ति पत्र लेने आईं, तो मुख्यमंत्री ने पहले उनसे कहा “यह क्या है?” और फिर स्वयं ही उनका हिजाब नीचे खींच दिया। इस घटना के बाद महिला डॉक्टर स्पष्ट रूप से चौंक गईं और तुरंत वहां एक अन्य अधिकारी ने उन्हें हटाया।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
-
राजनीतिक आलोचना:
विरोधी दलों, खासकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस ने इस व्यवहार की तीखी निंदा की है। RJD ने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए मुख्यमंत्री के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं और उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी देने की मांग की है। -
मानसिक स्वास्थ्य पर टिप्पणी:
विपक्ष ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री का यह कृत्य “अनुचित” और “असंवेदनशील” था, कुछ नेताओं ने उनकी मानसिक स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। -
धार्मिक स्वतंत्रता और गरिमा:
कई लोगों ने कहा है कि किसी भी महिला का हिजाब या धर्म से जुड़ा आभूषण या वस्तु उनकी व्यक्तिगत आज़ादी और धार्मिक पहचान का हिस्सा है, और सार्वजनिक रूप से उसे हटाना सम्मान का हनन है।
कार्यक्रम का संदर्भ
यह विवादित घटना उस कार्यक्रम में हुई जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना में 1,283 AYUSH डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र दे रहे थे — जिसमें आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा के चिकित्सक शामिल हैं।
जनता और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद कई लोगों ने इस घटना की निंदा की और कहा कि मुख्यमंत्री का यह व्यवहार अनुचित और असंवेदीनशील था। आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर किसी व्यक्ति का निजी धार्मिक प्रतीक हटाना समाज में गलत संदेश देता है। उच्च स्तर पर जांच और स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है।
क्या कहा जा रहा है? — संक्षेप
-
CM ने समारोह में महिला डॉक्टर का हिजाब हटाया।
-
वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक विरोध और आलोचना तेज हुई।
-
विपक्षी दलों ने इसे अनुचित, असम्मानजनक कार्रवाई बताया।
-
हिंदू और मुस्लिम समाज के कुछ समूहों ने भी इस घटना पर प्रतिक्रियाएँ जताई हैं।