Mattu Pongal 2026:मट्टू पोंगल – भारतीय संस्कृति में पशुओं को समर्पित विशेष पर्व

पशुधन के प्रति कृतज्ञता का पर्व

मट्टू पोंगल तमिलनाडु का एक प्रमुख पर्व है, जो पोंगल उत्सव के तीसरे दिन मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से पशुधन, खासकर गाय और बैल को समर्पित होता है। “मट्टू” का अर्थ है पशु और “पोंगल” का अर्थ है उफान या समृद्धि। इस दिन किसान अपने पशुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, क्योंकि खेती और जीवन-यापन में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

मट्टू पोंगल का महत्व

भारत एक कृषि प्रधान देश है और पशुधन यहाँ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। खेत जोतने से लेकर फसल ढोने और दुग्ध उत्पादन तक, गाय और बैल किसानों के सच्चे साथी होते हैं। मट्टू पोंगल के दिन इन पशुओं को केवल साधन नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य के रूप में सम्मान दिया जाता है। यह पर्व हमें प्रकृति, पशु और मनुष्य के बीच संतुलन और सह-अस्तित्व का संदेश देता है।

मट्टू पोंगल कब मनाया जाता है

मट्टू पोंगल हर वर्ष मकर संक्रांति के अगले दिन, यानी तमिल महीने “थाई” में मनाया जाता है। यह आमतौर पर 15 या 16 जनवरी को पड़ता है। पोंगल का चार दिवसीय उत्सव इस प्रकार होता है—

  1. भोगी पोंगल

  2. थाई पोंगल

  3. मट्टू पोंगल

  4. कानुम पोंगल

मट्टू पोंगल की परंपराएँ और रीति-रिवाज

इस दिन सुबह-सुबह किसान अपने पशुओं को स्नान कराते हैं और उनके सींगों को रंग-बिरंगे रंगों से सजाते हैं। गायों और बैलों के गले में घंटियाँ, फूलों की मालाएँ और नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। उनके माथे पर कुमकुम और चंदन लगाया जाता है। इसके बाद उन्हें विशेष रूप से बनाए गए पोंगल, गुड़, हरी घास और फल खिलाए जाते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्थानों पर पशुओं की शोभायात्रा निकाली जाती है। कुछ क्षेत्रों में पारंपरिक खेल और लोकनृत्य भी आयोजित किए जाते हैं। यह दिन उल्लास, संगीत और सामूहिक उत्सव का प्रतीक होता है।

जल्लीकट्टू और मट्टू पोंगल

तमिलनाडु में मट्टू पोंगल के अवसर पर जल्लीकट्टू नामक पारंपरिक खेल का भी आयोजन होता है। इसमें बैलों की शक्ति, साहस और फुर्ती का प्रदर्शन किया जाता है। यह खेल सदियों पुरानी परंपरा है और तमिल संस्कृति की पहचान माना जाता है। हालांकि, आज के समय में इसे पशु कल्याण के नियमों के साथ आयोजित करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

मट्टू पोंगल का सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश

मट्टू पोंगल केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें कृतज्ञता, करुणा और सम्मान का पाठ पढ़ाता है। यह दिन याद दिलाता है कि मानव जीवन केवल अपने लाभ के लिए नहीं, बल्कि सभी जीवों के साथ सामंजस्य बनाकर जीने के लिए है। पशुओं के बिना कृषि, पर्यावरण और मानव जीवन की कल्पना अधूरी है।

आधुनिक समय में मट्टू पोंगल

आज के समय में जब मशीनें खेती में अधिक उपयोग होने लगी हैं, तब भी मट्टू पोंगल का महत्व कम नहीं हुआ है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और पारंपरिक मूल्यों को जीवित रखता है। शहरों में भी लोग इस दिन गौशालाओं में जाकर गायों को चारा खिलाते हैं और पशु सेवा करते हैं।

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