रायपुर के Shaheed Veer Narayan Singh International Stadium में 3 दिसंबर 2025 को खेले गए दूसरे वनडे में दर्शकों को एक बेहद रोमांचक मुकाबले का मज़ा मिला। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 50 ओवर में 358/5 का शानदार स्कोर खड़ा किया — लेकिन जितनी उम्मीद थी, उतना भारतीय टीम बचा नहीं सकी। दक्षिण अफ्रीका ने चार विकेट से जीत हासिल कर सीरीज को 1-1 से बराबरी पर ला दिया।

भारतीय पारी: कोहली-गायकवाड़ ने खुला खज़ाना
भारत की पारी की शुरुआत कुछ धीमी रही, लेकिन बीच में आए दो धमाकेदार शतक ने टीम को एक जबरदस्त स्कोर तक पहुंचाया। Virat Kohli ने 90 गेंदों में 102 रन बनाये — यह उनका 53वां ODI शतक था। वहीं Ruturaj Gaikwad ने 105 रनों की पारी खेली, जो उनका पहला ODI शतक था। नवें विकेट के लिए दोनों ने 195 रनों की साझेदारी की — जो भारत की ओर से दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरे विकेट के लिए अब तक की उच्चतम साझेदारी बन गई।
पारी के अंत में कप्तान KL Rahul ने भी 66* (नाबाद) बनाकर स्कोर को मजबूत किया।
इस तरह, कुल मिलाकर भारत ने एक ‘विनिंग स्कोर’ जैसा लक्ष्य तय कर दिया — पाठकों को यकीन था कि 360+ लक्ष्य पर दबाव बनाए रखकर पारी बचाई जा सकती है।
दक्षिण अफ्रीका की जबर्दस्त वापसी: मार्करम की शतकीय पारी में छुपा जादू
लेकिन क्रिकेट में उम्मीद आखिरी गेंद तक रहती है — और इसी उम्मीद ने दक्षिण अफ्रीका को वापसी दिलाई। Aiden Markram ने 98 गेंदों में 110 रनों की शानदार पारी खेली — उनकी इस शतकीय पारी को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

Markram के अलावा Matthew Breetzke और Dewald Brevis ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया — Breetzke ने 68 रन, और Brevis ने 54 रन की आक्रामक पारी खेली।
उनकी इस साझेदारी व आक्रामक खेल ने भारत द्वारा दिया गया लक्ष्य पकड़ना संभव बना दिया। अंत में दक्षिण अफ्रीका ने लक्ष्य 4 गेंद शेष रहते हासिल कर लिया।
यानी, जिस पिच को शुरू में बल्लेबाज़ों के लिए बतौर स्वर्ग माना जा रहा था — वही पिच गेंदबाज़ों (बल्लेबाज़ी में) के लिए आसान साबित हुई, खासकर मौसम (शाम की नमी, डे ड्यू) ने दक्षिण अफ्रीका की मदद की।
भारतीय टीम की भूलें — क्यों हाथ से निकल गई मैच?
इतनी बड़ी पारी के बावजूद भारत हार गया — इसके पीछे कई कारण रहे:
-
पारी के आखिरी पाँच-छह ओवर में ज़रूरी तेजी नहीं दिखा पाना, जिससे 360+ के आंकड़े हासिल नहीं हुए।
-
बीच में फील्डिंग में कुछ छोटी-मोटी चूकें, और आउटफील्ड पर नमी के कारण गेंदबाज़ों के लिए गेंद संभालना मुश्किल हो गया।
-
टॉस हारना — भारत पहले से बल्लेबाजी करना पड़ा, और शाम की नमी का अंदेशा था।
कुल मिलाकर, खराब गेंदबाज़ी और फील्डिंग, और मौसम-सहोयोग ने मिलकर भारत का फायदा उठाया और दक्षिण अफ्रीका को मैच दिला दिया।
रिकॉर्ड, मायने और आगे क्या?
-
यह भारत के खिलाफ किसी टीम के खिलाफ ODI में अब तक का सफलतापूर्वक सबसे बड़ा मुकाबला रहा।
-
Markram की पारी ने यह दिखा दिया कि जब तक सिर्फ़ शतक नहीं आता — मैच सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
-
भारत के लिए यह संकेत है कि सिर्फ रनों का ढेर नहीं बल्कि मौसम और गेंदबाज़ी-नीति पर ध्यान देना होगा।
-
अब सीरीज का निर्णायक तीसरा ODI होगा, जिसमें विजेता सीरीज अपने नाम करेगा।
2nd ODI ने साबित कर दिया कि क्रिकेट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं — रणनीति, मनोबल, बदलते हालात, मानसिक मजबूती और टीम वर्क का मेल है। भारत ने अगर इतिहास रचा भी, तो भी मैच नहीं बचा पाया; वहीं दक्षिण अफ्रीका ने अपने साहस, संयम और ज़बरदस्त बल्लेबाज़ी से दिखा दिया कि बड़े लक्ष्य पीछा करना भी असंभव नहीं।
अगला मैच अब और भी अहम है — क्या भारत बदलेगा अपनी रणनीति, या दक्षिण अफ्रीका बढ़ाएगी जीत का सिलसिला?