दिल्ली विश्वविद्यालय का कैंपस एक बार फिर छात्र राजनीति के रंग में नजर आया। कई दिनों तक चले प्रचार, पोस्टर, नारे, सोशल मीडिया कैंपेन और उम्मीदवारों की भागदौड़ के बाद आखिरकार DUSU Election 2026 के नतीजे सामने आ गए हैं। शनिवार, 19 सितंबर को हुई मतगणना के बाद चार प्रमुख पदों के परिणाम घोषित किए गए।
इस बार का चुनाव कई मायनों में खास रहा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने चार में से तीन प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की, जबकि उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शोकीन ने जीत हासिल की।
अध्यक्ष पद पर यश डबास की जीत
DUSU अध्यक्ष पद के मुकाबले पर सबसे ज्यादा नजरें थीं। ABVP के यश डबास ने 24,576 वोट हासिल कर NSUI के विजय शंकर मीणा को हराया। मीणा को 22,523 वोट मिले।
यह मुकाबला काफी करीबी रहा। मतगणना के शुरुआती दौर में बढ़त लगातार बदलती रही, जिससे कैंपस में उम्मीदवारों और समर्थकों के बीच उत्सुकता बनी रही। आखिरकार अंतिम राउंड में यश डबास ने अध्यक्ष पद अपने नाम कर लिया।
उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शोकीन
इस चुनाव का सबसे चर्चित परिणाम उपाध्यक्ष पद का रहा। निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शोकीन ने 30,615 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। वे पहले NSUI से जुड़े रहे थे और इस बार स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे।
उनके सामने ABVP के इशु मौर्य को 16,910 और NSUI के वीर छत्राथ को 4,313 वोट मिले। शोकीन की जीत ने DUSU चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार की भूमिका को भी चर्चा में ला दिया।
सचिव और संयुक्त सचिव पद भी ABVP के नाम
सचिव पद पर ABVP की रिया छावड़ी ने 21,650 वोट हासिल किए। NSUI की नम्रता चौधरी को 14,869 वोट मिले।
संयुक्त सचिव पद पर भी मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। ABVP के लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट लेकर जीत दर्ज की। निर्दलीय उम्मीदवार विशाल यादव को 15,778 और NSUI के गोपाल चौधरी को 15,206 वोट मिले। यानी इस पद पर मुकाबला काफी नजदीकी रहा।
चुनाव सिर्फ नतीजों की कहानी नहीं
DUSU चुनाव को केवल चार पदों और वोटों के आंकड़ों से समझना आसान नहीं है। विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों के लिए यह चुनाव उनके रोजमर्रा के जीवन से जुड़े मुद्दों की आवाज भी है।
इस बार छात्र आवास, हॉस्टल की सुविधा, कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रचार के दौरान प्रमुखता से सामने आए। चुनाव में सोशल मीडिया की भूमिका भी काफी दिखाई दी। उम्मीदवारों ने Instagram और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं तक पहुंचने की कोशिश की।
दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाला हर छात्र छात्र राजनीति में सक्रिय हो, यह जरूरी नहीं है। लेकिन हॉस्टल की तलाश, आने-जाने का खर्च, कैंपस की सुरक्षा, लाइब्रेरी की सुविधा या परीक्षा से जुड़ी परेशानियां लगभग हर विद्यार्थी के जीवन को प्रभावित करती हैं। इसलिए चुनाव परिणामों के बाद असली उम्मीद यही रहती है कि चुने गए प्रतिनिधि इन रोजमर्रा के सवालों को कितनी मजबूती से उठाते हैं।
इस बार वोटिंग प्रतिशत भी चर्चा में रहा
18 सितंबर को हुए मतदान में करीब 40.46 प्रतिशत योग्य छात्रों ने वोट डाला। यह आंकड़ा पिछले दो वर्षों के मुकाबले अधिक था। 2024 में मतदान प्रतिशत 29.7 और 2025 में 39.45 प्रतिशत रहा था।
मतदान केंद्रों पर पहुंचने वाले छात्रों के लिए यह सिर्फ एक राजनीतिक चुनाव नहीं था। कई नए मतदाताओं के लिए यह पहली बार था जब उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर पर अपने प्रतिनिधि को चुनने के लिए वोट डाला। किसी ने अपने पसंदीदा उम्मीदवार को मुद्दों के आधार पर चुना, तो किसी ने संगठन और विचारधारा को ध्यान में रखा।
अब असली परीक्षा शुरू
नतीजे घोषित हो चुके हैं, लेकिन निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए अब असली काम शुरू होता है। चुनाव के दौरान किए गए वादों को छात्र कितनी जल्दी जमीन पर उतरते देखते हैं, यह आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण होगा।
DUSU की नई टीम के सामने छात्रों की अपेक्षाएं बड़ी हैं। हॉस्टल, सुरक्षा, कैंपस सुविधाओं और छात्र कल्याण जैसे मुद्दों पर अब भाषणों से आगे बढ़कर काम की उम्मीद की जाएगी।
आखिरकार छात्र राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सिर्फ चुनाव जीतना नहीं, बल्कि उन हजारों विद्यार्थियों की आवाज बनना है जिन्होंने अपना वोट देकर किसी उम्मीदवार पर भरोसा जताया है। यही भरोसा DUSU की नई टीम के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी है।





