khabar5

UGC Act/Regulations 2026: उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की शुरुआत

UGC Act/Regulations 2026

UGC Act/Regulations 2026

📜 UGC Act 2026: नए नियम 

भारत के उच्च शिक्षा तंत्र में 2026 में UGC (University Grants Commission) द्वारा एक बड़ा बदलाव लागू किया गया है। 13 जनवरी 2026 को UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 को आधिकारिक रूप से लागू किया गया है। इन नियमों का लक्ष्य है हाईर एजुकेशन संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकना, समावेशी माहौल सुनिश्चित करना और समान अवसर देना।

1. UGC 2026 नियम का उद्देश्य

नए नियमों का मूल उद्देश्य है:

UGC का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में भेदभाव की शिकायतें लगातार बढ़ी हैं, इसलिए अब केवल सलाहात्मक नियम नहीं बल्कि अनिवार्य और लागू करने योग्य नियम बनाये गये हैं।

2. मुख्य प्रावधान – क्या-क्या बदल गया?

यहाँ 2026 के नियमों के प्रमुख बदलाव समझिए:

📍 (A) Equal Opportunity Centre (EOC)

हर विश्वविद्यालय, कॉलेज तथा उच्च शिक्षा संस्थान में एक Equal Opportunity Centre स्थापित करना अनिवार्य है।
👉 यह केंद्र भेदभाव की शिकायतों को संभालेगा, प्रभावित लोगों को मदद देगा, और जागरूकता कार्यक्रम चलाएगा।

📍 (B) Equity Committee और प्रतिनिधित्व

हर संस्थान को एक Equity Committee बनानी होगी जिसमें:

यह समिति भेदभाव की शिकायतों की जांच और निवारण का काम करेगी। हेल्पलाइन 24×7 उपलब्ध रहेगी।

📍 (C) रिपोर्टिंग और जिम्मेदारी

संस्थान आधे-साल में दो बार और UGC को एक वार्षिक रिपोर्ट सौंपेंगे। संस्थान प्रमुख (Vice-Chancellor/Principal) जिम्मेदार होगा कि नियम सही से लागू हों।

📍 (D) कड़ी कार्रवाई / दंड

यदि कोई संस्थान नियमों का पालन नहीं करता, तो UGC उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकती है:

यह पहले के परामर्शात्मक दिशानिर्देशों की तुलना में कहीं अधिक मजबूत कदम है।

3. शिकायत कैसे दर्ज करें?

नए नियमों के अंतर्गत:

4. विवाद और आलोचना

हालाँकि नियम भेदभाव रोकने के उद्देश्य से बने हैं, उन्होंने गंभीर विवाद भी खड़ा कर दिया है:

(A) सामान्य वर्ग की चिंता

कुछ समूहों का कहना है कि नियमों में जनरल (सवर्ण) कैटेगरी के प्रतिनिधित्व का प्रावधान नहीं है। इसलिए उन्हें लगता है कि समितियों में संतुलित भागीदारी नहीं मिलेगी और यह नियम एक-तरफा हो सकते हैं।

(B) झूठी शिकायतों का दंड

पहले नियमों के प्रारूप में झूठी शिकायत पर दंड का प्रावधान था, लेकिन अंतिम रूप में यह हटाया गया। इससे आलोचक कहते हैं कि गलत आरोपों का दुरुपयोग हो सकता है।

(C) कानूनी चुनौतियाँ

कई पीआईएल (Public Interest Litigation) सुप्रीम कोर्ट में दायर की जा चुकी है ताकि नियम के कुछ प्रावधानों को संवैधानिक दृष्टि से चुनौती दी जा सके।

(D) सामाजिक बहस और राजनीतिक प्रतिक्रिया

नियम के खिलाफ सोशल मीडिया पर #UGCRollback ट्रेंड हुए हैं, और कई कॉलेज-यूनिवर्सिटी स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं।

Exit mobile version