khabar5

Ekadashi February 2026: इस महीने दो बार पड़ेगा विष्णु व्रत, दिन, तिथि और समय, देखें पूरी जानकारी

Ekadashi February 2026

Ekadashi February 2026

फरवरी 2026 में दो प्रमुख एकादशी व्रत हैं, जो हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भगवान विष्णु को समर्पित उपवास (व्रत) और पूजा के रूप में मनाए जाते हैं।

1) विजय (Vijaya) एकादशी — 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार)

🔹 यह एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की ग्यारस तिथि पर आती है।
🔹 एकादशी तिथि 12 फरवरी दोपहर से शुरू होकर 13 फरवरी दोपहर तक रहती है।
🔹 उपवास सूर्योदय से शुरू किया जाता है और पारण (उपवास तोड़ना) 14 फरवरी की सुबह शुभ मुहूर्त में किया जाता है।

2) आमलकी (Amalaki) एकादशी — 27 फरवरी 2026 (शुक्रवार)

🔹 यह एकादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की ग्यारस तिथि पर पड़ती है।
🔹 तिथि 27 फरवरी की बीच रात से शुरू होकर उसी दिन रात तक रहती है।
🔹 उपवास पारण 28 फरवरी की सुबह के शुभ समय में किया जाता है।

इन दोनों एकादशियों में उपवास के साथ-साथ आराधना, पूजा, कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम और सत्य व संयम का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व

एकादशी शब्द संस्कृत के दो भागों — “एक” (11) और “दशी” (दशा/दिन) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है चंद्रमा के प्रत्येक पक्ष के 11वें दिन की पवित्र तिथि। हिन्दू धर्म में इसे भगवान विष्णु का प्रिय दिन माना गया है, और भक्तगण इसे व्रत के साथ विधिपूर्वक मनाते हैं।

✨ अध्यात्म और पुण्य

एकादशी व्रत को आत्मिक शुद्धि, पापों का नाश और मोक्ष-प्राप्ति का साधन माना जाता है।
🔹 यह व्रत मन, वाणी और कर्मों में संयम लाता है
🔹 उपवास से व्यक्ति के शरीर का वमन, पाचन और क्रियाएं शांत हो जाती हैं जिससे अध्यात्म की ओर ध्यान केंद्रित होता है।
🔹 कहा जाता है कि एकादशी पर किया गया दान और विधिपूर्वक पूजा सभी पापों को धुल देती है और जीवन में सुख-समृद्धि लाती है।

🛕 ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताएँ

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एकादशी व्रत का पालन करने से भक्त का मन वश में आता है और जीवन में विजय, सफल कार्य और संतान-समृद्धि की प्राप्ति होती है। प्राचीन ग्रंथों में वर्णित है कि इस दिन भगवान विष्णु की उपासना से जीवन की कठिनाइयाँ संतुलित होती हैं और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता है।

विजय एकादशी — विशेष विवरण

विजय एकादशी का नाम “विजय” इसलिए पड़ा है क्योंकि यह व्रत विजय प्राप्ति और विपत्तियों पर विजय के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
🔹 भक्त इसी दिन उपवास रखकर मनोकामनाएँ पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं।
🔹 पारंपरिक कथा में बताया गया है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियम से विजय एकादशी व्रत करता है, उसे हर कार्य में सफलता और बाधाओं पर विजय प्राप्त होती है।

आमलकी एकादशी — विशेष विवरण

आमलकी एकादशी विशेष रूप से आंवला (आमलकी) वृक्ष के पूजन के लिए प्रसिद्ध है।
🔹 औषधीय गुणों से परिपूर्ण आमला को हिन्दू धर्म में पवित्र माना जाता है।
🔹 इस दिन तुलसी और आमलकी वृक्ष की पूजा कर भगवान विष्णु की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है।
🔹 यह व्रत स्वास्थ्य, समृद्धि और दीर्घायु के लिए अत्यंत लाभदायक कहा गया है।

एकादशी व्रत का पालन — नियम और विधियाँ

एकादशी पर व्रत का पालन कुछ प्रमुख नियमों से जुड़ा है:
🔹 उपवास का आरंभ सूर्योदय से पहले या एकादशी दिन के प्रारंभ से किया जाता है और पारण केवल द्वादशी (अगले दिन) सुबह शुभ मुहूर्त में किया जाता है।
🔹 दान-पुण्य, सेवा, तुलसी तथा विष्णु पठान व कीर्तन से व्रत का फल दुगुना माना जाता है।
🔹 अनाज, दाल-चावल और भारी भोजन से परहेज रहना चाहिए ताकि मन ध्यान में लगा रहे और शरीर शुद्ध रहे।

Exit mobile version